सुना है कि उनका बयाँ कुछ अलग है

किया कुछ अलग है ज़बाँ कुछ अलग है


मिली है पुराने सितारों की सोहबत

यहाँ इन दिनों आसमाँ कुछ अलग है


मिलूँगा नहीं अब पुराने मकाँ पर

अलग हूँ मैं मेरा मकाँ कुछ अलग है


हमारा मुक़द्दर बहुत मुख़्तलिफ़ था

हमारी जबीं पर निशाँ कुछ अलग है


ख़ुशी अपनी अपनी कि दुख अपने अपने

ज़माने अलग हैं जहाँ कुछ अलग है

                  डा. घनश्याम परिश्रमी