हर किसी की मुकम्मल थोडी  ज़िंदगी हो,

सूरज हो तो आसमाँ की भी ज़िंदगी हो।


चाँद-तारों से जो छुप-छुप के बात होती है,

उनकी ज़ुबाँ समझ सको वही ज़िंदगी हो।


तुमसे मिले, मगर कुछ समझ न पाए हम,

अब जो मिलें तो साथ हर सदी ज़िंदगी हो।


सुबह-शाम तू ही रहे ख़यालों में मेरे,

तेरा ही ख़्वाब बन के उभरे यही ज़िंदगी हो।


अच्छे लोग मिलेंगे कभी न कभी 'आदित्य',

तुम वक़्त पर मिलो—उम्र भर की ज़िंदगी हो।   


स्थान: विराटनगर, नेपाल