शिवनारायण सिंगलका हाेली कविता -:हाेली के धमाल, उडए रंग गुलाल जाेगिरा सररर
- चैत १, २०८१
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आइ जागल भाग्य गुलाल के
शिर चढि क चुम्मा लिअए, चिकन चुनमुन गाल के
आइ जागल.......
पियर पराेसे जल वरषाबे
हरियर हरित वन वाग फुलाबे
लाल गुलाल गगन मण्डलमे
विजय उत्सव मनाबे
आइ जागल........
हरदम लीन हरि भजन मे
भक्त प्रहाद कमाल के
हरिणाकश्यप सङ समन दहन भेल
हाेलिका कुटिल चण्डाल के
आइ जागल..........
जहिना
आसुरी शक्ति के नाश लेल
ईश्वरीय शक्ति के उत्थान भेल
तहिना
अखिनाे समाजमे नुकाएल
बहुताेरास हाेलिकाक
समन करु हर हाल मे
दहन करू विकृत कंकाल के
तब जागत भाग्य गुलाल के




















