शिवनारायण सिंगलका   कविता -: मैथिली भाषाक यथाेचित ठाम दियाै //

                                       - शिवनारायण सिंगल


  मैथिली सरस सलिल भाषा

  समृद्ध,आ मधुर मातृ-भाषा

  मैथिली बाेल मान शान हमर

  मैथिली छिए पहिचान हमर।


माए के  मुँहक  मिठरस बाेल 

गर्भे सँ जेना  अमृतरस घाेल

हमर संस्कृति इतिहास कला

मैथिलीक अपन पैघ भूगाेल ।


मैथिली भाषाक  गाैरव गाओ

आइ मातृभाषा दिवस मनाओ

समताक सम्मान पहिचान दियाै 

मैथिलीक यथाेचित ठाम दियाै ।

०८१/११/९ ( 21 Feb.025)